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अनुभवकथन |
चांगली माणसे ..एक अनुभव !! |
Rahul Rajopadhye |
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अनुभवकथन |
कर्जाचं दुःखणं |
अनुराधा धामोडे |
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कथा |
रिकामं पोट... |
Raosaheb Jadhav |
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कथा |
धग |
सचिन शिंदे |
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कथा |
मातीमोल आयुष्य |
Pratibha |
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कथा |
अन तिनं धडकल्या चुलीवर तवा टाकला... |
Raosaheb Jadhav |
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कथा |
तोंडचा घास |
आशिष आ. वरघणे |
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कथा |
हुईल कायतरी !! |
Rahul Rajopadhye |
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कथा |
पोटची भाकर |
आशिष आ. वरघणे |
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कथा |
तहान |
shirish bhaskar... |
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कथा |
पाचवीला पुजलेलं -'ऋण' |
Narendra Gandhare |
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कर्जमुक्ती आंदोलन |
पार्टी द्या, कर्ज घ्या; कोंबडी द्या, वसुली थांबवा |
गंगाधर मुटे |
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कवितेचे रसग्रहण |
तुमचं काय गेलं:- मंगेश पाडगावकर व्यंगातून जीवन भाष्य |
Kiran dongardive |
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कवितेचे रसग्रहण |
बायल्यावाणी कायले मरतं? |
Pradip Deshmukh |
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कवितेचे रसग्रहण |
कुणब्याचं जगणं काळजावर गोंदवणारा कवी : संतोष आळंजकर |
सचिन शिंदे |
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कवितेचे रसग्रहण |
माझ्या गावाकडे चल माझ्या दोस्ता:कवी इंद्रजित भालेराव |
Khillare bramhadev |
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काव्यसंग्रह समीक्षण |
काव्यसंग्रह समिक्षा- वावरातल्या रेघोट्या |
Pradip Deshmukh |
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काव्यसंग्रह समीक्षण |
मातीत हरवल्या कविता : ग्रामीण कवितेचा समृद्ध हुंकार |
मुक्तविहारी |
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काव्यसंग्रह समीक्षण |
मातीत हरवलेल्या कविता: शेती मातीच्या नव्या कोंबाची कविता। |
Kiran dongardive |
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गझल |
उद्योग हिरवळीचा |
Pradip thool |
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गझल |
सत्ते तुझ्या प्रितिचे.... |
Rajesh Jaunjal |
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गझल |
कर्जाच्या जाचात शेती |
Ramesh Burbure |
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गझल |
भाषणात बोलला नेता ! ! |
Rahul Rajopadhye |
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गझल |
गज़ल : सीमेवरी जराशे जाऊन या तुम्ही. |
Dr. Ravipal Bha... |
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गझल |
गझल: कर्जातल्या जिवांच्या नशिबास कोण तारी! |
Dhirajkumar Taksande |