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14-09-2011 |
सत्तास्थळ हेच भ्रष्टाचाराचे सर्वात मोठे तीर्थक्षेत्र : उत्तरार्ध |
गंगाधर मुटे |
वांगे अमर रहे |
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15-08-2011 |
माझी ललाटरेषा |
गंगाधर मुटे |
माझी मराठी गझल |
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15-07-2011 |
स्वप्नरंजन फार झाले |
गंगाधर मुटे |
माझी मराठी गझल |
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06-09-2011 |
अस्तित्व दान केले - लोकमत दिवाळी अंक |
गंगाधर मुटे |
माझी मराठी गझल |
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03-09-2011 |
मा. शरद जोशी यांना वाढदिवसाच्या शुभेच्छा - बरं झालं देवाबाप्पा |
गंगाधर मुटे |
वांगे अमर रहे |
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29-05-2011 |
हत्या करायला शीक |
गंगाधर मुटे |
वांगे अमर रहे |
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31-08-2011 |
उद्दिष्ट, चोरी आणि आयुष्य ......! |
गंगाधर मुटे |
माझी कविता |
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27-08-2011 |
पलाट साडेबाराचा - आगरी गझल |
डॉ.कैलास गायकवाड |
शेतकरी गीत |
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25-08-2011 |
च्यायला बुडवा हा सहकार |
Anil Ghanwat |
शेतकरी गीत |
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23-08-2011 |
भ्रष्टाचार्यास हाण पाठी : पोवाडा |
गंगाधर मुटे |
माझी कविता |
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21-08-2011 |
राखेमधे लोळतो मी (हजल) |
गंगाधर मुटे |
माझी मराठी गझल |
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20-08-2011 |
अनादि काळापासूनच भ्रष्टाचाराचा उगम : लेखांक - २ |
गंगाधर मुटे |
वांगे अमर रहे |
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19-08-2011 |
सत्तास्थळ हेच भ्रष्टाचाराचे सर्वात मोठे तीर्थक्षेत्र : लेखांक - १ |
गंगाधर मुटे |
वांगे अमर रहे |
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26-07-2011 |
आम्ही शेतकरी बाया |
संपादक |
शेतकरी गीत |
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16-07-2011 |
डोंगरी शेत माझं गं |
संपादक |
शेतकरी गीत |
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15-07-2011 |
कान पकडू नये |
गंगाधर मुटे |
माझी मराठी गझल |
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15-07-2011 |
पांढरा किडा |
गंगाधर मुटे |
माझी मराठी गझल |
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30-06-2011 |
वरुणा ! वरुणा ! |
डॉ.श्रीकृष्ण राऊत |
शेतकरी गीत |
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28-06-2011 |
आता गरज पाचव्या स्तंभाची |
गंगाधर मुटे |
वांगे अमर रहे |
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15-07-2011 |
गवसला एक पाहुणा |
गंगाधर मुटे |
माझी कविता |