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| प्रकाशन दिनांक | प्रकार | शिर्षक | लेखक | वाचने | प्रतिसाद |
अंतिम अद्यतन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 17/02/2023 | माझे गद्य लेखन | ब. ल. नावाचा अखंडित झरा आज खंडित झाला | गंगाधर मुटे | 1,359 | 17/02/23 | |
| 04/02/2023 | अध्यक्षांचा स्तंभ | अन्नसुरक्षेची एशितैशी | Anil Ghanwat | 1,117 | 04/02/23 | |
| 22/01/2023 | अध्यक्षांचा स्तंभ | प्रश्न फक्त वायदेबंदीचा नाही | Anil Ghanwat | 976 | 22/01/23 | |
| 12/01/2023 | साहित्य चळवळ | विश्वस्तरीय Online लेखनस्पर्धा-२०२२ : निकाल | गंगाधर मुटे | 4,021 | 1 | 12/01/23 |
| 05/01/2023 | लेखनस्पर्धा-२०२२ | कवितेचे रसग्रहण | rajendraphand | 3,803 | 1 | 05/01/23 |
| 05/01/2023 | लेखनस्पर्धा-२०२२ | शेती म्हणजे | rajendraphand | 1,279 | 05/01/23 | |
| 05/01/2023 | लेखनस्पर्धा-२०२२ | सृतिगंध... एक मागोवा | nilkavi74 | 1,146 | 05/01/23 | |
| 04/01/2023 | लेखनस्पर्धा-२०२२ | धग | सचिन शिंदे | 1,311 | 04/01/23 | |
| 04/01/2023 | लेखनस्पर्धा-२०२२ | मातीतून येणारा शब्दरूपी दरवळ - काळी आई | सचिन शिंदे | 1,611 | 04/01/23 | |
| 04/01/2023 | लेखनस्पर्धा-२०२२ | प्राणप्रिय बळीमित्रास | सचिन शिंदे | 1,073 | 04/01/23 |
विश्वस्तरीय लेखनस्पर्धा : २०१४ ते २०२४
| प्रकाशन दिनांक | शिर्षक | लेखक | वाचने |
|---|---|---|---|
| 14-11-2023 | एकदासं तू मरणं देगा... | nilkavi74 | 3,813 |
| 18-11-2023 | शेती आणि माती | NILESHDESHMUKH | 3,742 |
| 26-10-2023 | आज माझ्या कापसाला भाव द्या | nilkavi74 | 3,304 |
| 14-11-2023 | बळी असेच कितीदा स्वतःला वामनाकडून गाडून घेणार? | सतीश शंकरराव मानकर | 5,343 |
| 13-11-2023 | बळीराजा : "तेव्हा आणि आता सुद्धा"..... | Narendra Gandhare | 3,699 |
शेतकरी साहित्य चळवळ-संमेलन
| प्रकाशन दिनांक | शिर्षक | वाचने |
|---|---|---|
| 28-08-2015 | विश्वस्तरीय लेखनस्पर्धा-२०१५ : नियम, अटी व तपशिल | 11,653 |
| 05-03-2015 | शेतकरी साहित्य संमेलन : सिंहावलोकन व पुढील नियोजन | 27,566 |
| 23-03-2015 | संमेलनाध्यक्ष मा. शरद जोशी यांचे भाषण | 2,534 |
| 19-03-2015 | पहिले शेतकरी साहित्य संमेलन : स्वागताध्यक्षांचे भाषण | 2,991 |
| 18-03-2015 | पहिले शेतकरी साहित्य संमेलन : प्रास्ताविक भाषण | 3,471 |
नवीन प्रतिसाद