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   पाचवे अ.भा.मराठी शेतकरी साहित्य संमेलन, पैठण

    दिनांक : शनिवार, रविवार, २ व ३ फेब्रुवारी २०१९  
    स्थळ : संत एकनाथ ज्ञानपीठ, माहेश्वरी जनकल्याण सभागृह, पैठण, जि. औरंगाबाद

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हिंदी किसानगीत

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मेरे देश की धरती

लेखनप्रकार : 

शेतकरी गीत

काव्यप्रकार: 
शेतकरी गीत

मेरे देश की धरती

मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं
ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं
सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे ...१

जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अँगड़ाइयाँ लेती है
क्यों ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जन्म लिया उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोई नही हैं सब पे है माँ उपकार तेरा ...२

ये बाग़ हैं गौतम नानक का खिलते हैं अमन के फूल यहाँ